राष्ट्रपति ट्रंप ने बांग्लादेश पर कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे और इसे पीएम मोदी के हाथों में सौंपेंगे

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ढाका
 भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अमेरिका का दौरा किया है। पीएम मोदी के साथ एक सवाल के जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ऐसा कहा है, जिसने ढाका के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। खासतौर से मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार और उनका समर्थन कर रहे दक्षिणपंथी इस्लामी दलों की फिक्र बढ़ी है। ट्रंप ने बांग्लादेश में भारत के कदम का समर्थन करने का संकेत दिया है, जिससे नई दिल्ली के विरोधी यूनुस की टेंशन बढ़ सकती है।

स्वराज्य मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाशिंगटन डीसी में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह बांग्लादेश को प्रधानमंत्री मोदी पर छोड़ेंगे। ट्रंप के बयान से साफ है कि अमेरिका बांग्लादेश में शामिल नहीं होना चाहता और भारत के साथ चलेगा। ट्रंप के इस रुख ने यूनुस सरकार और देश के इस्लामवादियों के गणित को बिगाड़ दिया है, जो भारत विरोधी हैं। ये भारत के पूर्वोत्तर में उग्रवादी समूहों का समर्थन करके दिल्ली के सामने मुसीबत खड़ी करने की कोशिश करते रहे हैं।

ट्रंप के सत्ता में आने से बिगड़ा यूनुस का खेल

यूनुस के बारे में माना जाता है कि उनको अमेरिकी डीप स्टेट, पाकिस्तान और तुर्की के कुछ तत्वों ने सत्ता में बिठाया। वह खुद को सत्ता में मजबूत करने के लिए अमेरिका से क्लिंटन फाउंडेशन जैसे अपने संरक्षकों पर भरोसा कर रहे थे। अमेरिका में ट्रंप के सत्ता में आने और अमेरिकी डीप स्टेट के विदेशी प्रभाव को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू करने से यूनुस और बांग्लादेश के इस्लामवादियों की योजनाएं धरी रह गई हैं।

मोहम्मद यूनुस और इस्लामी पार्टियों के लिए सबसे बुरी खबर यह है कि अमेरिका की ओर से बांग्लादेश को भारत पर छोड़ा जा रहा है। ट्रंप के बयान ने उन्हें एहसास करा दिया है कि भारत के खिलाफ कदम दिल्ली की ओर से कड़ी जवाबी कार्रवाई को आमंत्रित करेगा और अमेरिका से उनको मदद नहीं मिलेगी। ट्रंप के बयान ने मुख्यधारा के लोकतांत्रिक दलों, खासतौर से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का मनोबल बढ़ाया है। BNP बांग्लादेश में जल्दी चुनाव चाहती है लेकिन यूनुस संसदीय चुनावों को टालने में लगे हैं।

चुनाव पर जोर देगा भारत

डोनाल्ड ट्रंप के रुख के बाद नई दिल्ली अब बांग्लादेश में जल्द संसदीय चुनाव कराने पर जोर देगी। स्वराज्य से बात करते हुए एक शीर्ष भारतीय अधिकारी ने कहा कि दिल्ली ने ट्रंप प्रशासन को आश्वस्त किया है कि बांग्लादेश में जल्द चुनाव देश में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि हमने वॉशिंगटन में नए प्रशासन को इस बारे में बताया है और वे हमारे साथ हैं।

MEA अधिकारी ने कहा कि भारत इस साल के अंत तक यूनुस सरकार को संसदीय चुनाव कराने के लिए मजबूर करने की कोशिश करेगा। ढाका में एक निर्वाचित सरकार के सत्ता में आने से इस्लामवादियों और दूसरे गुट खुद ही हाशिए पर चले जाएंगे। इससे शेख हसीना की अवामी लीग के लिए भी राजनीतिक क्षेत्र में वापसी का मार्ग प्रशस्त होगा। ये साफतौर पर मोहम्मद यूनुस की फिक्र को बढ़ाएगा।

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